Ashwagandha ka churn ghar par kaise taiyar Karen

 अश्वगंधा का चूर्ण घर पर कैसे तैयार करें | Ashwagandha ka churn ghar par kaise taiyar Karen | | Ashwagandha churn | Winter cherry

अश्वगंधा का चूर्ण घर पर कैसे तैयार करें

अश्वगंधा पावडर अपने घर बनाए । Make Ashwagandha Powder at Home

इंग्लिश में इसको विंटर चेरी ( Winter cherry ) कहते हैं जैसा कि नाम से पता चलता है अश्वगंधा इसका मतलब घोड़ा होता है याने के घोड़े जैसी गंध वाला इसलिए इसको अश्वगंधा के नाम से जाना जाता है | यह भारत में विभिन्न नामों से जाना जाता है |  इस पौधे के हर हिस्से का प्रयोग किया जाता है | पत्ता, तना, जड़, बीज सभी का प्रयोग अलग-अलग कामों में किया जाता है | हम इस का चूर्ण बनाने की विधि के बारे में यहां वर्णन कर रहे हैं इसका चूर्ण बनाना बहुत ही ज्यादा आसान है | इसे आप अपने घर पर ही तैयार कर सकते हैं | इसके और भी नाम है Withania somnifera, Winter cherry, Indian ginseng, Poison gooseberry, Nightshade

 Ashwagandha ka powder kaise banaye | अश्वगंधा का पाउडर कैसे बनाये

अश्वगंधा का चूर्ण बनाना बहुत ही ज्यादा आसान है | बाजार में भी अश्वगंधा चूर्ण उपलब्ध है अगर आप विश्वास करते हैं | तो बाजार से खरीद कर इसका सेवन कर सकते हैं अन्यथा आप अपने आप घर पर चूर्ण तैयार कर सकते हैं इस चूर्ण को बनाना बेहद ही आसान है |

आइए देखते हैं इस चूर्ण को कैसे बनाएं सबसे पहले हम बाजार से अश्वगंधा लेकर आएंगे | इसको अच्छी तरह सुखा लेंगे सुखाने के बाद इसको कूट लेंगे | ध्यान रहे इसको हम धीरे-धीरे ही कूट लेंगे, क्योंकि इसका पाउडर बनने लगता है और पाउडर उड़ता है इसलिए इसको बहुत ध्यान से और धीरे-धीरे ही कूट लेंगे | जब यह छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाए तब हम मिक्सर ग्राइंडर का प्रयोग करेंगे आप हम सारे टुकड़ों को मिक्सी के जार में रख लेंगे और इसे बारीक पीस लेंगे ध्यान रहे हम मिक्सी के जार को एक साथ नहीं खोलेंगे | जार को थोड़ी देर रखा रहने देंगे उसके बाद जार को खुलेंगे आपका अश्वगंधा का चूर्ण बनकर तैयार है | इसे बारीक छान लेंगे |

अश्वगंधा चूर्ण एक प्राकृतिक जड़ी-बूटी है जो पुरानी आयुष्य और आयुर्वेदिक चिकित्सा में उपयोग की जाती है। यह जड़ी-बूटी प्रक्रिया करके पाउडर या चूर्ण रूप में उपलब्ध होती है और मस्तिष्क, शरीर और मन के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए उपयोग की जाती है। इस लेख में, हम अश्वगंधा चूर्ण के बारे में प्राथमिक जानकारी, इतिहास, आयुर्वेदिक गुण, उपयोग, स्वास्थ्य लाभ, उपयोग की विधि और संभावित प्रतिक्रियाएं जानेंगे ।

1. प्राथमिक जानकारी:

अश्वगंधा (Withania somnifera) जड़ी-बूटी धारण करने वाला एक छोटा पौधा है जो प्राकृतिक रूप से भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है। इसे 'भारतीय जिंसेंग' के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसके प्रयोग स्वास्थ्य और वीर्य प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए किये जाते हैं। अश्वगंधा संभवतः 2500 वर्षों से अधिक समय से आयुर्वेदिक चिकित्सा में उपयोग हो रही है ।

2. इतिहास:

अश्वगंधा का उपयोग भारतीय आयुर्वेदिक पद्धति में बहुत प्राचीन समय से हो रहा है। यह पौधा पुरानी संस्कृति में महत्वपूर्ण मान्यता रखता है और अनेक प्रयोगों में उपयोग होता है। इसे एक रासायनिक औषधि के रूप में सम्मानित किया जाता है जो स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं को सुधार सकती है। अन्य प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में भी अश्वगंधा की प्रशंसा की गई है जैसे चारक संहिता, सुश्रुत संहिता, और अष्टांग हृदयम्

3. आयुर्वेदिक गुण:

अश्वगंधा आयुर्वेदिक चिकित्सा में एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में मान्यता प्राप्त करती है । इसकी औषधीय गुणों को संतुलित करने के लिए इसमें कई प्रमुख एक्टिव संघटक होते हैं, जिनमें विथानोलाइड्स, वितमिन्स, मिनरल्स, फ्लावोनॉयड्स, टैनिन, आक्टिनोलाइड्स, एंटिआइनोकाइनोन, स्टीरोइड्स, और लैक्टोन्स शामिल हैं । यह गुण अश्वगंधा को एक प्रमुख वनस्पति बनाते हैं जो शरीर, मस्तिष्क और मन के स्वास्थ्य को पोषित कर सकती हैं

4. उपयोग:

अश्वगंधा चूर्ण को विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है । यह मस्तिष्क संबंधी स्वास्थ्य, शारीरिक तंद्रा, वजन प्रबंधन, वीर्य प्रदर्शन, इम्यूनिटी बढ़ाने, तनाव और अवसाद का नियंत्रण, रक्तचाप के नियंत्रण, पाचन और सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है । यह मस्तिष्क संबंधी स्वास्थ्य को सुधारक और मेमोरी बढ़ाने के लिए भी जाना जाता है । अश्वगंधा चूर्ण के नियमित उपयोग से तंद्रा की कमी, तनाव कम करने, मनोवृद्धि, और सामान्य शारीरिक संतुलन में सुधार हो सकता है ।

5. स्वास्थ्य लाभ:

अश्वगंधा चूर्ण के उपयोग से कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। निम्नलिखित कुछ मुख्य लाभ शामिल हैं:

स्ट्रेस का नियंत्रण: अश्वगंधा चूर्ण एक प्राकृतिक तत्व है जो स्ट्रेस और तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। इसका उपयोग तनाव से संबंधित समस्याओं, जैसे कि अवसाद और चिंता, कम करने के लिए किया जाता है ।

मस्तिष्क स्वास्थ्य की सुधार: अश्वगंधा चूर्ण मस्तिष्क के लिए बहुत उपयोगी है। यह मस्तिष्क को शक्ति, ताकत, और स्मरणशक्ति बढ़ाने में मदद कर सकता है। इसका नियमित सेवन मेमोरी को बढ़ा सकता है और याददाश्त को सुधार सकता है ।

शारीरिक संतुलन: अश्वगंधा चूर्ण का उपयोग शारीरिक संतुलन को सुधारने के लिए भी किया जा सकता है। यह तंद्रा की कमी को दूर करने, शारीरिक ताकत बढ़ाने, और सामान्य शक्ति और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकता है ।

वीर्य प्रदर्शन के लिए मदद: अश्वगंधा चूर्ण पुरुषों के वीर्य प्रदर्शन को बढ़ाने में सहायता कर सकता है। इसका नियमित सेवन स्तंभन दोष, नपुंसकता, और वीर्य की कमी को दूर कर सकता है।


 

अश्वगंधा के फायदे और नुकसान

  • यह वजन को कम करने और बढ़ाने दोनों में ही सहायक है |

  • जिन लोगों के बाल समय से पूर्व सफेद हो जाते हैं उनके लिए भी है बहुत सहायक होता है इसका सेवन करने से बालों की समस्या खत्म हो जाती है |

  • दर्द को कम करने के लिए भी इसके पत्तों का प्रयोग कर सकते हैं |

  • अगर आपको चर्म संबंधित रोग है तो आप अश्वगंधा चूर्ण का प्रयोग कर सकते हैं यह चर्म रोग में फायदा करता है |

  • यह सेक्स के समय होने वाली परेशानी को दूर करता है तथा थकान को महसूस नहीं होने देता है |

  • इसका प्रयोग दूध या पानी किसी के भी साथ कर सकते हैं या फिर इसका प्रयोग काढ़ा बनाकर भी किया जा सकता है |

  • यह हमारे रसोई घर में रखे जाने वाला चूर्ण है |

  • यह कैंसर जैसी बीमारियों को भी दूर करने में सहायक है बहुत सारे चिकित्सक इसकी सलाह देते हैं |

  • जो लोग जिम जाते हैं उनके लिए यह बहुत ही अच्छी औषधि है आप जिम में जो पाउडर का प्रयोग करते हैं उसकी जगह पर आप अश्वगंधा के चूर्ण का प्रयोग कर सकते हैं यह आपकी मसल्स को बनाने में बहुत ही उपयोगी है |

  • गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए |
  • अगर वक्त में कोई दोष है तो चिकित्सक से परामर्श करके इसका प्रयोग किया जा सकता है |

  • इसके पत्तों के सेवन से शरीर का वजन कम हो जाता है तथा मांसपेशियां मजबूत हो जाती है |

  • इसका सेवन चिकित्सक के परामर्श से ही करना चाहिए कभी-कभी ऐसा होता है इसका सेवन करने से आपको उल्टी या मितली की शिकायत हो सकती है |

  • जिन लोगों की प्रवृत्ति गर्म होती है उन्हें चूर्ण का प्रयोग नहीं करना चाहिए इससे आप को बुखार जैसा महसूस हो सकता है |





अश्वगंधा हाइट बढ़ाता है ? | Ashwagandha increases height

कुछ लोगों का ऐसा मानना है की अश्वगंधा को सतावर तथा मिश्री के साथ लेने से हाइट में वृद्धि होती है लेकिन इसके लिए ऊंटनी का दूध तथा गाय के दूध का ही प्रयोग किया जाता है ऐसा कुछ लोगों का मानना है | 

अश्वगंधा का पौधा | Ashwagandha plant

यह जंगल में पाए जाने वाला झाड़ नुमा पौधा होता है इसकी ऊंचाई दो से तीन फ़ीट होती है इस पर छोटे छोटे लाल रंग की बेर की तरह फल आता है जो एक  खोल के अंदर बंद होता है इसे सीधा भी खाया जा सकता है |  

तनाव, चिंता, मानसिक समस्या को दूर करता है |

ऐसा भी मानना है कि किसी कारणवश लोग अकारण चिंता से ग्रसित होते हैं या उन्हें मानसिक तनाव होता है | उसके लिए अश्वगंधा को एक बहुत ही अच्छी जड़ी बूटी या औषधि के रूप में देखा जाता है आप इसका सेवन करके इन समस्याओं का निवारण कर सकते हैं | 

अश्वगंधा मुलेठी अर्जुन की छाल के होने वाले फायदे क्या  है |

अश्वगंधा, मुलेठी और अर्जुन की छाल तीनों हर्बल पदार्थ हैं जिन्हें आयुर्वेद में महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां अश्वगंधा, मुलेठी और अर्जुन की छाल के कुछ फायदों की सूची है:

स्वास्थ्य में ताकत का वर्धन: अश्वगंधा, मुलेठी और अर्जुन की छाल में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट और प्राकृतिक तत्व शरीर को ताकत प्रदान करते हैं और व्यायाम क्षमता में सुधार करते हैं।

    हृदय स्वास्थ्य का समर्थन: अर्जुन की छाल हृदय के लिए विशेष रूप से उपयोगी होती है। इसमें मौजूद वसोडिलेटरी (वासोडिलेशन को बढ़ाने वाले) गुण शरीर के रक्त प्रवाह को सुधारते हैं और हृदय के लिए शांति और संतुलन स्थापित करते हैं।

    स्वास्थ्य में स्थिरता का समर्थन: अश्वगंधा में मौजूद विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर के लिए महत्वपूर्ण होते हैं और उसे स्थिर और स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

1.स्वास्थ्य में सुधार: मुलेठी का उपयोग श्वसन प्रणाली के लिए उपयोगी होता है, जिससे श्वसन मार्ग को स्वच्छ और स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है।

2. प्रतिरक्षा प्रणाली को सुधारना: अश्वगंधा और मुलेठी में मौजूद तत्व शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत और सुरक्षित बनाने में मदद करते हैं।

3. तनाव को कम करना: अश्वगंधा में मौजूद तत्व शरीर के तनाव को कम करने में मदद करते हैं और मनोवैज्ञानिक तनाव को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।

4. वृद्धि कारक हार्मोन को संतुलित करना: अश्वगंधा में मौजूद वृद्धि कारक हार्मोन को संतुलित करने में मदद कर सकता है, जिससे शरीर का संतुलन बना रहता है।

5. स्वास्थ्य में शुद्धता का समर्थन: मुलेठी और अर्जुन की छाल में मौजूद विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर के अंतःस्थल में शुद्धता और स्वस्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

6. शरीर के ऊर्जा स्तर को बढ़ाना: अश्वगंधा में मौजूद तत्व शरीर के ऊर्जा स्तर को बढ़ाने में मदद करते हैं और शरीर को ताजगी और ऊर्जा से भरपूर बनाए रख सकते हैं।

7. मानसिक स्वास्थ्य का समर्थन: अश्वगंधा में मौजूद तत्व शरीर के मानसिक स्वास्थ्य को समर्थन करते हैं, जिससे मन शांत और स्थिर रह सकता है।

ध्यान देने योग्य बातें

जब आप इसका चूर्ण बनाएं तो इसे बहुत धीरे-धीरे कुटे मिक्सर ग्राइंडर में पीसने के बाद जार को थोड़ी देर के लिए रख दें |
और इसका प्रयोग करने के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श करें |

उपयोग की विधि:

अश्वगंधा चूर्ण को अनुशासित मात्रा में उपयोग करना चाहिए। आपको एक व्यापारी या आयुर्वेदिक वैद्य से सलाह लेना चाहिए ताकि आप अपने व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर सही प्रभाव डाल सकें। आमतौर पर, १००० मि.ग्रा. से ३००० मि.ग्रा. तक की दैनिक मात्रा की सिफारिश की जाती है। इसे गर्म पानी के साथ ले सकते हैं या इसे दूध, घी या मधु संयुक्त रूप से लेने का विचार भी किया जा सकता है। 

संभावित प्रतिक्रियाएं:

अश्वगंधा चूर्ण का सामग्रीगत प्रयोग आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। हालांकि, कुछ लोगों में कुछ अवांछित प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं, जैसे कि पेट में अवसाद, उलटी, अचानक ताकत की कमी, और अलर्जी। इन प्रतिक्रियाओं के मामले में, इसका उपयोग बंद कर देना चाहिए और चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

सामान्य रूप से लिया जाता है, अश्वगंधा चूर्ण सामग्रीगत औषधि के रूप में मान्यता प्राप्त करता है और आयुर्वेदिक चिकित्सा में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह स्वास्थ्य को सुधारने, मस्तिष्क संबंधी स्वास्थ्य को बढ़ाने, तनाव को कम करने, और सामान्य शारीरिक संतुलन को सुधारने में मदद कर सकता है। हालांकि, हमेशा यह ध्यान देना चाहिए कि हर व्यक्ति अलग होता है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति भी अलग होती है, इसलिए सबसे अच्छा है कि आप अपने चिकित्सक की सलाह लें और सही मात्रा और उपयोग की सिफारिश करें।
 

 



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टिप्पणियाँ

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